महासमुंद।* धान के बाद छत्तीसगढ़ में मखाना को नई नकदी फसल के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ा है। महासमुंद जिले के बागबाहरा एवं महासमुंद विकासखंड के लगभग 80 प्रगतिशील किसानों के लिए मखाना की वैज्ञानिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम दिनांक 3 जून को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी थे। विशेष अतिथि के रूप में भारतीय किसान संघ के प्रांत संगठन मंत्री मनीष शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं तकनीकी मार्गदर्शन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं मखाना परियोजना के समन्वयक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर ने किया।
किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी
डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर ने किसानों को मखाना की खेती की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने बीज दर, बुवाई का समय, तालाब प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण और प्रसंस्करण तक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मखाना कम लागत, कम श्रम और बिना कीट-व्याधि वाली फसल है जो किसानों की आय दोगुनी कर सकती है।
बदलाव और सामूहिकता जरूरी” – सुरेश चंद्रवंशी
मुख्य अतिथि सुरेश चंद्रवंशी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि “बदलते परिवेश में परंपरागत खेती के साथ-साथ हमें नई फसलों को अपनाना होगा। मखाना जैसी फसल से न केवल आय बढ़ेगी बल्कि जल संरक्षण भी होगा। किसान भाइयों को सामूहिकता के भाव से खेती करनी चाहिए, तभी हम वास्तव में स्वावलंबी बन पाएंगे।”
सीखकर अपनाना जरूरी” – मनीष शर्मा
विशेष अतिथि मनीष शर्मा ने कहा कि “यदि हम प्रशिक्षण और भ्रमण के लिए समय निकालते हैं लेकिन सीखी हुई बातों को अपने खेत में नहीं उतारते, तो सारा परिश्रम व्यर्थ चला जाता है। सरकार द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं और तकनीकों को अपनाकर ही हम अपनी खेती को समृद्ध बना सकते हैं।”
किसानों में दिखा उत्साह
प्रशिक्षण के बाद किसानों ने मखाना की खेती अपनाने में रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि कम पानी और कम मेहनत में अच्छी आमदनी वाली यह फसल उनके लिए वरदान साबित हो सकती है।
इस सफल आयोजन में डॉ. आनंद ढीमर, डॉ. योगेन्द्र चंदेल, प्रबंधक संजय नामदेव एवं श्री शिव साहू का विशेष योगदान रहा।

