कवर्धा। जिले के बाजारा चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों से धान खरीदी सत्र 2024-25 के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कमी के मामले में 10 माह बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। कलेक्टर के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच समिति अब तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर पाई है, जिससे पूरे मामले की जांच और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सितंबर 2025 में शिकायत सामने आने के बाद जिला खाद्य शाखा, जिला विपणन विभाग और धान खरीदी से जुड़े नोडल अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित की गई थी। उद्देश्य था कि धान की कमी के कारणों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी जांच किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है।
आरोप है कि बाजारा चारभाठा संग्रहण केंद्र में 6,46,486 क्विंटल धान के मुकाबले 22,997 क्विंटल तथा बघर्रा संग्रहण केंद्र में 1,57,042 क्विंटल धान के मुकाबले 4,673 क्विंटल धान कम पाया गया। दोनों केंद्रों में कुल 27,670 क्विंटल धान की कमी दर्ज होने का दावा किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 8.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मामले में बाजारा चारभाठा के तत्कालीन केंद्र प्रभारी को निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें पुनः बहाल कर दिया गया। वहीं बघर्रा केंद्र के प्रभारी के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा, कथित धान शॉर्टेज के बावजूद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही सरकारी राशि की वसूली की गई है।
युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया है कि जिले में धान खरीदी सत्र 2024-25 के दौरान कुल 46,360 क्विंटल से अधिक धान की कमी सामने आई, जिसकी अनुमानित कीमत 14.37 करोड़ रुपये से अधिक है। उनका यह भी दावा है कि धान खरीदी सत्र 2025-26 में भी लगभग 52 हजार क्विंटल धान की कमी दर्ज हुई है, जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
धान शॉर्टेज मामले के दौरान चूहों, दीमक, कीटों और मौसम को नुकसान का कारण बताए जाने पर भी विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा को विवादित बयान के चलते निलंबित किया गया था। हालांकि, आरोप है कि वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं की गई है।
मामले में अब जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करने तथा सरकारी नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने की मांग लगातार उठ रही है। फिलहाल संयुक्त जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
