कवर्धा: शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान के प्रति जिज्ञासा, स्वतंत्र चिंतन और जीवन को समझने की दृष्टि विकसित 8करना है। इस दिशा में पुस्तकें जहाँ कल्पनाओं को विस्तार देती हैं और विचारों को समृद्ध बनाती हैं, वहीं अभिभावकों एवं शिक्षकों के बीच सार्थक संवाद बच्चों की क्षमताओं को पहचानने और उन्हें सही दिशा देने का अवसर प्रदान करता है। इसी सोच के साथ अभ्युदय स्कूल, कवर्धा में 30 एवं 31 अक्टूबर को दो दिवसीय पुस्तक मेले एवं अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) का सफल आयोजन किया गया। दोनों आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनके शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास में विद्यालय और परिवार की
साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य तोरण साहू जी एवं अकादमिक प्रमुख श्रीमती व्ही. शोभा जी द्वारा रिबन काटकर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य तोरण साहू जी, अकादमिक प्रमुख श्रीमती व्ही. शोभा जी, एडमिनिस्ट्रेटर कुलदीप रजक जी, एचआर श्रीमती प्रीति सिंह जी, उपप्राचार्य फजलुर रहमान खान जी, प्राइमरी कोऑर्डिनेटर श्रीमती रीता सिंह जी, प्री-प्राइमरी कोऑर्डिनेटर सुश्री मौसमी वैष्णव जी सहित समस्त शिक्षकगण एवं अभिभावकगण उपस्थित रहे।इस दो दिवसीय पुस्तक मेले में विभिन्न विषयों एवं विधाओं की पुस्तकों का आकर्षक संग्रह उपलब्ध कराया गया। विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों और कवर्धा नगर के अन्य पुस्तक प्रेमियों को भी अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकें देखने एवं खरीदने का अवसर मिला। यह पुस्तक मेला केवल विद्यालय के विद्यार्थियों तक सीमित न रहकर कवर्धावासियों के लिए भी खुला रहा। दोनों ही दिन प्रातः 9 बजे से शाम 4 बजे तक सभी के लिए प्रवेश की व्यवस्था की गई। इस पहल के माध्यम से विद्यालय ने समाज में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने और पुस्तकों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण
विकसित करने का प्रयास किया।साथ ही पुस्तक मेले के प्रति शिक्षकों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। सभी शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की तथा अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न पुस्तकों का अवलोकन कर उनकी खरीदारी भी की। शिक्षकों की इस सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और अधिक उत्साहपूर्ण बनाया तथा यह संदेश दिया कि सीखने और पढ़ने की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली यात्रा है।इसी क्रम में आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) भी कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। इस बैठक के माध्यम से अभिभावकों को अपने बच्चों की शैक्षणिक यात्रा और विद्यालय में उनके समग्र विकास को करीब से समझने का अवसर मिला। शिक्षकों ने अभिभावकों के साथ विद्यार्थियों के विषयवार प्रदर्शन, परीक्षा परिणाम, नियमितता, अनुशासन, कक्षा में सहभागिता, गृहकार्य, व्यवहार, रुचियों तथा सीखने की क्षमता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। साथ ही विद्यार्थियों की विशेष उपलब्धियों और उनकी सकारात्मक प्रगति को साझा करते हुए उन क्षेत्रों पर भी ध्यान आकर्षित किया गया, जहाँ उन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन एवं अभ्यास की आवश्यकता है।बैठक के दौरान अभिभावकों ने भी अपने बच्चों की सीखने की आदतों, घर पर उनके व्यवहार, रुचियों और व्यक्तिगत चुनौतियों से संबंधित विचार एवं सुझाव शिक्षकों के साथ साझा किए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्हें बेहतर सहयोग देने के लिए उपयोगी सुझाव दिए तथा पढ़ाई में
नियमितता, समय प्रबंधन, आत्मनिर्भरता और सकारात्मक आदतों के विकास पर विशेष बल दिया। इस संवाद का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों से अवगत कराना नहीं, बल्कि उनकी क्षमताओं को पहचानते हुए उनके शैक्षणिक, सामाजिक, भावनात्मक एवं व्यक्तित्व विकास के लिए एक साझा कार्ययोजना तैयार करना भी रहा। इस प्रकार पीटीएम ने विद्यालय और अभिभावकों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और सहयोग के संबंध को और अधिक मजबूत किया। इस आयोजन के अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य तोरण साहू जी ने अपने संदेश में कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर असीम संभावनाएँ छिपी होती हैं, आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने, समझने और सही दिशा देने की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता को केवल परीक्षा परिणामों और अंकों के आधार पर नहीं आँकना चाहिए, बल्कि उनके आत्मविश्वास, रचनात्मकता, व्यवहार और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने पुस्तक मेले के संदर्भ में कहा कि पुस्तकें विद्यार्थियों के विचारों को व्यापकता प्रदान करती हैं और उन्हें
पाठ्यपुस्तकों से परे ज्ञान के विविध क्षेत्रों से परिचित कराती हैं। नियमित पठन की आदत बच्चों में कल्पनाशक्ति, तार्किक क्षमता और स्वतंत्र चिंतन को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए विद्यालय और परिवार दोनों को एक-दूसरे के पूरक बनकर कार्य करना होगा। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की तुलना करने के बजाय उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा को प्रोत्साहित करें, उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुनें और उन्हें अपनी रुचियों के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षक और अभिभावक मिलकर ऐसा वातावरण तैयार कर सकते हैं, जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी अपनी विशिष्ट पहचान बना सके।तत्पश्चात
अकादमिक प्रमुख श्रीमती व्ही. शोभा जी ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता, रुचि और प्रगति का स्तर अलग-अलग होता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत क्षमताओं को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन देना भी है। अभिभावक-शिक्षक बैठक इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम है, जहाँ शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चे की आवश्यकताओं को समझते हैं। उन्होंने पुस्तक मेले को विद्यार्थियों में स्वाध्याय, स्वतंत्र चिंतन और ज्ञान के प्रति जिज्ञासा विकसित करने का एक उत्कृष्ट अवसर बताया।अंत में विद्यालय प्रबंधन ने हर्ष ज्ञापित करते हुए अपने सन्देश में बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के साथ-साथ पुस्तकों, रचनात्मक गतिविधियों और अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक है। विद्यालय का निरंतर प्रयास है कि विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण मिले, जहाँ वे केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि
जीवनोपयोगी कौशल, सकारात्मक दृष्टिकोण और अच्छे संस्कार भी विकसित कर सकें। इस प्रकार के आयोजन विद्यालय और समाज के बीच शैक्षणिक जुड़ाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

