कवर्धा,
पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य व युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष भुनेश्वर पटेल ने विज्ञप्ति जारी करते कहा मरार पटेल समाज की आराध्य देवी माता शाकंभरी जयंती के अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 24 अक्टूबर 2021 को सामान्य अवकाश घोषित कर समाज को मान–सम्मान दिया गया था। भूपेश बघेल सरकार की मंशा स्पष्ट थी कि पटेल समाज से जुड़े सभी लोग, विशेषकर सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारी–कर्मचारी, अवकाश के कारण अपनी आराध्य देवी की पूजा-अर्चना एवं सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागी बन सकें।

धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़:
भुनेश्वर पटेल ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि, “शाकंभरी जयंती मरार पटेल समाज के लिए सबसे बड़ा और पवित्र पर्व है। इस दिन समाज का हर व्यक्ति माता शाकंभरी की पूजा और ‘छेरछेरा’ के दान-पुण्य के कार्यों में लगा रहता है। शासन द्वारा इस दिन सार्वजनिक अवकाश देने का उद्देश्य ही यही है कि लोग अपनी संस्कृति और धर्म का पालन कर सकें।
इसके बावजूद कबीरधाम जिले में अवकाश के दिन ही प्रशासन द्वारा एक अति आवश्यक बैठक आयोजित किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है।
दिनांक 03 जनवरी 2026 (शनिवार) को स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय के ऑडिटोरियम में कलेक्टर कबीरधाम की अध्यक्षता में सभी शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों की समीक्षा बैठक रखी गई, जिसमें अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश जारी किए गए और यह स्पष्ट किया गया कि प्रतिनिधि मान्य नहीं होगा।
यह निर्णय मरार पटेल समाज की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं के साथ सीधा अन्याय है। जब शासन स्वयं अवकाश घोषित करता है, तब उसी दिन इस प्रकार की अनिवार्य बैठक आयोजित करना सरकारी मंशा के विपरीत और प्रशासनिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है। इससे समाज के अनेक शिक्षक, प्राचार्य एवं शासकीय सेवक अपने सामाजिक और धार्मिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सके।
मैं जिला प्रशासन से मांग करता हूँ कि भविष्य में ऐसे निर्णय लेने से पूर्व सामाजिक, धार्मिक आस्था और घोषित अवकाश की भावना का सम्मान किया जाए। यदि इस तरह की मनमानी दोबारा की गई, तो मरार पटेल समाज को मजबूरन संगठित होकर विरोध का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।



