कवर्धा:विद्यार्थियों के सर्वांगीण एवं समग्र विकास हेतु कृतसंकल्पित नगर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान अभ्युदय स्कूल, कवर्धा में दिनांक 16 एवं 17 फरवरी 2026 को प्री-नर्सरी से कक्षा द्वितीय तक के नन्हे-मुन्ने, कोमलांगी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों द्वारा द्वि-दिवसीय वार्षिक उत्सव “Fusion & Fiesta” का अत्यंत भव्य, मनोहारी एवं उल्लासमय आयोजन किया गया।
यह उत्सव बाल-मन की निष्कलुष अभिव्यक्ति, सृजनात्मकता, आत्मविश्वास तथा सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम सिद्ध हुआ। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे मासूम, चंचल, किलकारी भरते बाल-कलाकारों ने अपनी मधुर मुस्कान, भोली भाव-भंगिमाओं एवं सुमधुर प्रस्तुतियों से समस्त दर्शक-दीर्घा को मंत्रमुग्ध कर दिया। संपूर्ण वातावरण हर्ष, उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो उठा।कार्यक्रम में विद्यालय के वर्ष 2025 के मेधावी विद्यार्थियों के पालकगण को विशेष रूप से मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन अभिषेक सिंह जी,निर्देशक सपन चोपड़ा जी, प्राचार्य तोरण साहू जी,
अकादमिक प्रमुख श्रीमती व्ही. शोभा जी, उप-प्राचार्य फजलुर रहमान खान जी, कोऑर्डिनेटर श्रीमती रीता सिंह जी,प्री-प्राइमरी कोऑर्डिनेटर मौसमी वैष्णव जी, समस्त शिक्षकगण, अभिभावकगण एवं विद्यार्थीगण की स्नेहिल उपस्थिति रही।कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं तिलक वंदन से हुआ, जिससे समूचा वातावरण पावन एवं गरिमामय हो उठा। मंच संचालन दल द्वारा सुस्पष्ट एवं आत्मविश्वासपूर्ण स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया तथा नन्हे स्वर-कुंजों द्वारा गाया गया मधुर स्वागत-गीत मानो कोयल की कूक सा वातावरण में मधुरिमा घोल गया।प्रथम दिवस के मुख्य अतिथि नंदकुमार सोनी जी, श्रीमती वर्षा सोनी जी, संजय जैन जी, श्रीमती मनीषा जैन जी रहे।अतिथि अभिभावकों ने अपने उद्बोधन में विद्यालय परिवार का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब हमने अपने बच्चे का प्रवेश इस विद्यालय में कराया था, तब हमारे मन में कई उम्मीदें और कुछ आशंकाएँ भी थीं। लेकिन आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो महसूस होता है कि हमने सही निर्णय लिया। इस विद्यालय ने न केवल हमारे बच्चे को उत्कृष्ट शिक्षा दी, बल्कि उसके व्यक्तित्व को भी निखारा है।
विद्यालय के अनुशासन, शिक्षकों के समर्पण और प्राचार्य महोदय के मार्गदर्शन ने हमारे बच्चे के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नैतिक मूल्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।हमारे बच्चे की इस सफलता में केवल उसकी मेहनत ही नहीं, बल्कि शिक्षकों का निरंतर मार्गदर्शन, विद्यालय प्रबंधन का सहयोग और घर-विद्यालय के सामंजस्य का भी बड़ा योगदान रहा है।अंत में हम यही कहना चाहते हैं कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की कार्यशाला है। हमें गर्व है कि हमारा बच्चा इस संस्था का हिस्सा है।वही दूसरे दिवस के अतिथिगण कृष्णा सोनी जी, श्रीमती मीरा सोनी जी, नितेश अग्रवाल जी, श्रीमती माया अग्रवाल जी, अजय कुमार लुनिया जी एवं श्रीमती हंसा लुनिया ज की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई।उन्होने सामूहिक रूप से बताया कि आज का यह क्षण हम सबके लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण है। एक अभिभावक के रूप में जब हम अपने बच्चे को इस मंच पर सम्मानित होते देखते हैं तो मन कृतज्ञता से भर जाता है।इस विद्यालय से हमारा जुड़ाव कई वर्षों पुराना है। छोटे से नन्हे कदमों से शुरू हुआ यह सफर आज सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचा है। इस पूरे सफर में विद्यालय ने हमारे बच्चे को केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि उसे एक अच्छा इंसान बनना भी सिखाया।यहाँ के शिक्षकों ने हर कठिनाई में बच्चों का साथ दिया, उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें अपने लक्ष्य की ओर निरंतर प्रेरित किया। जब भी हमारे बच्चे को किसी विषय में
कठिनाई हुई, शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन देकर उसे आगे बढ़ाया।विद्यालय प्रबंधन की दूरदर्शिता और सकारात्मक वातावरण ने बच्चों को सुरक्षित और प्रेरणादायक माहौल प्रदान किया। आप सभी ने ही मिलकर हमारे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी है।इसके पश्चात् आरंभ हुई बाल-कलाकारों की मनोहर प्रस्तुतियों की श्रृंखला रंग-बिरंगे परिधानों में सजे चंचल शिशुओं ने सुसंगठित समूह नृत्य द्वारा दर्शकों की भरपूर तालियाँ बटोरीं।नन्हे पगों की लयबद्ध थिरकन और भोली मुस्कान ने सबका मन मोह लिया। एकल नृत्य प्रस्तुतियों में बाल-हृदय की निष्कपट अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास झलकता दिखाई दिया।क्लासिकल एवं वेस्टर्न ग्रुप डांस के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया।इन सबमे विशेष आकर्षण रहा नन्हे उस्तादों द्वारा गिटार एवं हारमोनियम पर प्रस्तुत सुमधुर वाद्य-वादन, जिसने वातावरण में भावनात्मक माधुर्य घोल दिया।इन नन्हे सितारों की प्रत्येक प्रस्तुति में मासूमियत, सृजनात्मकता और आनंद की छटा स्पष्ट परिलक्षित हुई।इस अवसर पर चेयरमैन
अभिषेक सिंह जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब छोटे-छोटे बच्चे मंच पर आते हैं, तो वे सर्वप्रथम अपने माता-पिता को ही खोजते हैं। जैसे ही उनकी दृष्टि अपने अभिभावकों पर पड़ती है, उनका उत्साह, आत्मविश्वास और ऊर्जा स्वतः ही बढ़ जाती है। अतः विद्यालय और अभिभावकों के मध्य सुदृढ़ समन्वय एवं सतत संवाद अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने आगे अत्यंत प्रेरक शब्दों में कहा कि आज हमारी कक्षा में 30 विद्यार्थी हैं, जहाँ प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत मार्गदर्शन और स्नेहपूर्ण वातावरण उपलब्ध है। परंतु यदि हम व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें, तो देश के अनेक शिक्षण संस्थानों में एक ही कक्षा में सैकड़ों–हजारों विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। ऐसे परिवेश में वास्तविक चुनौती केवल आगे निकलने की नहीं, बल्कि स्वयं को पहचानने की होती है।अतः हमें अंधी प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शामिल होने के स्थान पर अपने बच्चों की अंतर्निहित प्रतिभाओं, रुचियों और विशिष्ट कौशलों को पहचानना चाहिए तथा उन्हें उचित दिशा और प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए। जब हम प्रत्येक बालक की मौलिक क्षमता को समझकर उसे संवर्धित करने का प्रयास करते हैं, तभी वह आत्मविश्वास से परिपूर्ण होकर जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करता है।तत्पश्चात अपने प्रेरक एवं ओजस्वी संबोधन में प्राचार्य तोरण साहू जी ने कहा“वार्षिक उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, अपितु यह बाल-मन के आत्मविश्वास, रचनात्मकता एवं नेतृत्व क्षमता को विकसित करने का सशक्त मंच है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें उचित दिशा देना है।इन नन्हे कदमों में भविष्य की असीम संभावनाएँ निहित हैं। जब विद्यालय, अभिभावक और शिक्षक एक सूत्र में बंधकर कार्य करते हैं, तब बालक का व्यक्तित्व समग्र रूप से विकसित होता है। हमें गर्व है कि हमारे ये नन्हे रत्न आज इतने आत्मविश्वास के साथ मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे हैं। यही छोटे-छोटे प्रयास आगे चलकर बड़े स्वप्नों की आधारशिला बनते हैं।”उन्होंने समस्त अभिभावकों के सहयोग एवं विश्वास के प्रति आभार व्यक्त किया।तदुपरांत विद्यालय की अकादमिक प्रमुख श्रीमती व्ही. शोभा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा

“सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ विद्यार्थियों के बौद्धिक, भावनात्मक एवं सामाजिक विकास का अभिन्न अंग हैं। जब बालक मंच पर आता है, तो उसका आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति-कौशल और सामूहिक भावना सुदृढ़ होती है।आज इन नन्हे-मुन्ने बालकों की प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि उचित मार्गदर्शन और स्नेहपूर्ण वातावरण मिले, तो हर बालक एक उज्ज्वल सितारा बन सकता है। विद्यालय सदैव उनके सर्वांगीण विकास हेतु प्रतिबद्ध रहेगा।अंत में *कोऑर्डिनेटर श्रीमती रीता जी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा“इन मासूम चेहरों की मुस्कान और उनकी निश्छल अभिव्यक्ति ही हमारे परिश्रम का सबसे बड़ा पुरस्कार है। प्रत्येक प्रस्तुति के पीछे बच्चों का उत्साह, शिक्षकों का समर्पण और अभिभावकों का सहयोग निहित है।हमें प्रसन्नता है कि हमारे नन्हे सुमनों ने आज अपनी प्रतिभा की सुगंध से इस मंच को सुवासित कर दिया। तदुपरांत प्री-प्राइमरी कोऑर्डिनेटर मौसमी जी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि प्री-प्राइमरी कक्षाएँ बच्चों की शिक्षा की मजबूत और सुदृढ़ नींव होती हैं। नर्सरी में हम मोंटेसरी पद्धति द्वारा गतिविधि-आधारित शिक्षण कराते हैं, जिससे बच्चों में आत्मनिर्भरता, एकाग्रता और अनुशासन का विकास होता है।केजी 1 एवं केजी 2 में एक्ससीड
पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों को समझ के साथ सीखने और उसे जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जाती है। हमारा शिक्षण खेल-खेल में सीखने पर आधारित है, जिससे पढ़ाई आनंददायक और प्रभावी बनती है।हम प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान देते हुए उसके आत्मविश्वास, संवाद कौशल और संस्कारों के विकास पर विशेष कार्य करते हैं। अभिभावकों के निरंतर सहयोग के लिए हम हृदय से आभारी हैं। आज की प्रस्तुतियाँ बच्चों की मेहनत, आत्मविश्वास और सामूहिक कार्य की भावना का सुंदर उदाहरण हैं।अंत में औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए विद्यालय परिवार की ओर से सभी मुख्य अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकगण एवं सहयोगी कर्मचारियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया।













